जंतर-मंतर प्रदर्शन में बच्चों की मौजूदगी पर उठे सवाल, फंडिंग को लेकर भी लगाए आरोप
नई दिल्ली/सिलीगुड़ी। जंतर-मंतर पर हुए नीट पेपर लीक विरोध प्रदर्शन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आयोजकों अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को शिकायत सौंपी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों को शामिल किया गया। इसी आधार पर पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है।
क्या हैं शिकायत के मुख्य आरोप?
अधिवक्ता का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान 12 वर्ष की बच्चियों की मौजूदगी रही। उनका कहना है कि यदि नाबालिगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी आयोजकों की तय होनी चाहिए। शिकायत में पॉक्सो अधिनियम की धाराओं का उल्लेख करते हुए मामले की जांच की मांग की गई है।
फंडिंग पर भी उठाए सवाल
शिकायत में प्रदर्शन के लिए धन के स्रोत पर भी सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता ने मांग की है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाएं कि आयोजन के लिए धन कहां से आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।
दिल्ली में भी शिकायत दर्ज
इस बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने भी दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत देकर अभिजीत दीपके के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि दीपके के सहयोगियों ने उन पर पहले हमला किया था और इस संबंध में पहले से मामले दर्ज हैं। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित मामलों में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसी के खिलाफ कौन-सी धाराएं लागू होती हैं और क्या कोई अपराध प्रथम दृष्टया बनता है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

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