राजौरी। जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील नौशेरा सेक्टर में सीमा के पास संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन गतिविधि ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी। सेना के जवानों ने आसमान में ड्रोन जैसी वस्तुओं की गतिविधि देखी और तत्काल निगरानी तथा काउंटर-ड्रोन उपाय सक्रिय किए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई के बाद ड्रोन को नियंत्रण रेखा के पार लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
नौशेरा-राजौरी क्षेत्र में पहले भी ड्रोन गतिविधियां सामने आती रही हैं। जुलाई 2026 में नौशेरा के तारकुंडी-साज इलाके में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने के बाद सेना, सीमा सुरक्षा बल और पुलिस ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका रहती है कि ऐसे ड्रोन निगरानी के अलावा हथियार या नशीले पदार्थ गिराने के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, हालांकि हर घटना में इसका उद्देश्य तत्काल स्पष्ट नहीं होता।
सीमा पर ड्रोन चुनौती से निपटने के लिए भारत ने बहुस्तरीय प्रतिरोधक क्षमता विकसित की है। इसमें ड्रोन की पहचान, निगरानी, संचार बाधित करने और जरूरत पड़ने पर उसे निष्क्रिय करने वाली प्रणालियां शामिल हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित स्वदेशी प्रतिड्रोन प्रणाली में रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तथा रेडियो आवृत्ति आधारित पहचान और अवरोधन क्षमताएं शामिल हैं।
नौशेरा में ताजा गतिविधि के बाद सीमा पर निगरानी और कड़ी किए जाने की संभावना है। **।**

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