रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन और पुलिस के बीच टकराव अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। गिरिडीह और हजारीबाग में हुई झड़पों के मामले में पुलिस ने तीन प्राथमिकी दर्ज की हैं। इनमें 28 लोगों को नामजद और 900 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
हजारीबाग में 21 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने की कोशिश और पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट के मामले में 18 नामजद तथा करीब 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। गिरिडीह में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। एक मामले में झामुमो के जिला अध्यक्ष संजय सिंह समेत 11 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि दूसरी प्राथमिकी में करीब 10 नामजद और 200 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
छात्र नेताओं का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए प्राथमिकी का सहारा ले रही है। उनका यह भी दावा है कि कुछ छात्र नेताओं के नाम रांची और हजारीबाग की अलग-अलग प्राथमिकी में दर्ज हैं। ऐसे में वे सवाल उठा रहे हैं कि एक ही व्यक्ति एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं में आरोपी कैसे हो सकता है। इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उधर, भाजपा ने छात्र आंदोलन पर सरकार की कार्रवाई को लेकर हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि रोजगार और भर्ती व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले युवाओं की आवाज दबाई जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की कार्रवाई वास्तव में हिंसा और सरकारी काम में बाधा डालने वालों तक सीमित रहती है या आंदोलन से जुड़े व्यापक छात्र समुदाय पर भी इसका असर पड़ेगा। भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले से जारी विवाद के बीच एफआईआर ने झारखंड की सियासत को और गरमा दिया है।

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