देश में धान की पारंपरिक और देशी किस्मों के संरक्षण तथा उनके वैज्ञानिक अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने तीन प्रमुख अनुसंधान संस्थानों को 8 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता जारी की है।
यह राशि धान की दुर्लभ एवं पारंपरिक प्रजातियों के संरक्षण, जैव विविधता के दस्तावेजीकरण, आनुवंशिक संसाधनों के वैज्ञानिक अध्ययन तथा जलवायु परिवर्तन के अनुरूप नई अनुसंधान परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य देशी धान की उन किस्मों को सुरक्षित रखना है, जो बेहतर पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, कम पानी में उत्पादन और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन किस्मों का संरक्षण भविष्य की खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार का कहना है कि यह पहल किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी तथा भारत की समृद्ध कृषि जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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