हरारे। जिम्बाब्वे की करिबा झील में हुई भीषण नौका दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। बचाव अभियान के दौरान शनिवार को 26 और शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक मृतकों में 18 बच्चे भी शामिल हैं। हादसा 11 अगस्त को उस समय हुआ, जब नौका तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच पलट गई।
हादसे के बाद राहत और बचाव दल लगातार झील में तलाशी अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 77 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, लेकिन नौका में कुल कितने लोग सवार थे और कितने लोग अब भी लापता हैं, इसका अंतिम आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
जांच में सबसे गंभीर सवाल नौका में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने को लेकर उठ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक नौका की क्षमता करीब 90 यात्रियों की थी, जबकि हादसे के समय इसमें 150 से अधिक लोगों के होने का अनुमान है। इसी वजह से नौका की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
करिबा झील जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित विशाल जलाशय है और आसपास के ग्रामीण तथा मछली पकड़ने वाले इलाकों के लिए नौका परिवहन का महत्वपूर्ण साधन है। सड़क संपर्क कमजोर होने के कारण स्थानीय लोग इस तरह के जल परिवहन पर निर्भर रहते हैं।
हादसे ने नौका की क्षमता, सुरक्षा मानकों और खराब मौसम में संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों ने दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
**एक सफर, जिसने दर्जनों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी—अब सवाल है कि क्षमता से अधिक यात्रियों को नौका पर चढ़ने की अनुमति आखिर किसकी लापरवाही थी?**

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