62 करोड़ की कुर्की ने फिर खोला इंदौर के कन्फेक्शनरी कारोबार का विवाद

जैसवानी-अहलावत विवाद के बीच एचडीएफसी बैंक की बड़ी कार्रवाई, दो कंपनियों के ऋण खाते नवंबर 2025 में एनपीए घोषित; 60 दिन में भुगतान नहीं तो गिरवी संपत्तियों की बिक्री


प्रणव बजाज



इंदौर। कन्फेक्शनरी कारोबार से जुड़े इंदौर के चर्चित विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। संजय जैसवानी, रशियन नागरिक गौरव अहलावत और उनसे जुड़ी कंपनियों के बीच चल रहे विवाद के बीच एचडीएफसी बैंक ने करीब 62 करोड़ रुपये की वसूली के लिए सार्वजनिक कुर्की नोटिस जारी किए हैं। बैंक की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।


बैंक की ओर से जारी दो अलग-अलग नोटिसों में मेसर्स केमको च्यू फूड्स प्राइवेट लिमिटेड पर 42 करोड़ 15 लाख रुपये और मेसर्स जीआरवी बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 20 करोड़ 20 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है। नोटिस के मुताबिक दोनों ऋण खातों को नवंबर 2025 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए घोषित किया गया था। बैंक ने संबंधित पक्षों को निर्धारित अवधि में भुगतान करने का अवसर दिया है। भुगतान नहीं होने की स्थिति में बंधक संपत्तियों को बेचकर बैंक की राशि वसूलने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।


कौन-कौन हैं घेरे में?


42 करोड़ रुपये वाले मामले में संजय जैसवानी सहित कई व्यक्तियों और कंपनियों को उधारकर्ता अथवा गारंटर के रूप में नोटिस में शामिल किया गया है। इनमें संजय कलवानी, अंशु डेम्बला, गिरीश वाधवानी, करतार सिंह, काजल जैसवानी, विजय जैसवानी, साक्षी जैसवानी, तरुण जैसवानी और संबंधित कंपनियों के नाम बताए गए हैं।


दूसरे यानी 20 करोड़ 20 लाख रुपये वाले मामले में गौरव अहलावत का नाम भी गारंटर के रूप में सामने आता है। इसके अलावा संजय जैसवानी, साक्षी जैसवानी, काजल जैसवानी, तरुण जैसवानी, विजय जैसवानी तथा अन्य कंपनियां नोटिस में शामिल हैं।


विवाद सिर्फ बैंक की देनदारी तक सीमित नहीं


इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। करीब दो वर्ष पहले संजय जैसवानी से जुड़ी कन्फेक्शनरी कंपनियों और गौरव अहलावत के बीच कारोबारी विवाद सामने आया था। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए और कानूनी मामले भी सामने आए। इसके बाद विवाद अदालत और अन्य कानूनी मंचों तक पहुंच गया।


अब बैंक की वसूली कार्रवाई ने इस पुराने विवाद की आर्थिक परत भी सामने ला दी है। सवाल यह है कि जिस कारोबारी विवाद को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है, उसमें कंपनियों की वित्तीय स्थिति यहां तक कैसे पहुंची कि करोड़ों रुपये के ऋण खाते एनपीए हो गए?


एनसीएलटी से लेकर पुलिस शिकायतों तक


इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण यानी एनसीएलटी से जुड़े मामलों और शिकायतों का भी उल्लेख सामने आया है। संजय कलवानी की ओर से शिकायत, कथित धमकी देकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के आरोप तथा कंपनियों के संचालन को लेकर उठे सवालों ने विवाद को और पेचीदा बनाया है।


वहीं गौरव अहलावत की ओर से भी संजय जैसवानी के खिलाफ शिकायत और प्राथमिकी से जुड़ा विवाद सामने आया। अहलावत के देश छोड़कर मॉस्को लौटने और सुरक्षा संबंधी चिंता जताने की खबरों ने भी मामले को अलग दिशा दी।


इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने पर उसे भी इस पड़ताल में शामिल किया जाना चाहिए।


सबसे बड़ा सवाल—62 करोड़ की वसूली और कारोबार का भविष्य


एचडीएफसी बैंक की कार्रवाई फिलहाल इस विवाद का सबसे ठोस आर्थिक पहलू है। करीब 62 करोड़ रुपये की देनदारी और बंधक संपत्तियों की संभावित बिक्री से जुड़े नोटिस ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि इन कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति क्या है और विवाद के बीच कारोबार का नियंत्रण एवं देनदारियों की जिम्मेदारी किस तरह तय होगी।


यह मामला केवल दो कारोबारियों के बीच विवाद नहीं रह गया है। बैंक की करोड़ों की वसूली, एनपीए खाते, एनसीएलटी की कार्यवाही, पुलिस शिकायतें और कंपनियों से जुड़े अनेक नाम—सभी कड़ियां अब एक बड़े कारोबारी विवाद की तस्वीर बना रही हैं।


अब निगाह इस बात पर है कि 60 दिन की अवधि के बाद बैंक क्या कदम उठाता है और क्या करोड़ों की बंधक संपत्तियां वास्तव में नीलामी तक पहुंचती हैं। यही कार्रवाई इस पूरे मामले की अगली और सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर तय करेगी।

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