जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म की खरीद से जुड़े करीब 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभाग से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से टेंडर की शर्तों और प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्धारित शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और कुछ विशेष कंपनियों या आपूर्तिकर्ताओं को लाभ मिलने की संभावना बनती है।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी अदालत के सामने सरकार के जवाब और मामले की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने फिलहाल टेंडर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। सरकार को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
यह रोक फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने टेंडर को अंतिम रूप से अवैध घोषित कर दिया है।
350 करोड़ की खरीद पर क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों से जुड़ी यूनिफॉर्म की खरीद में बड़ी सार्वजनिक राशि खर्च होनी है। इसलिए टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और सरकारी धन के उचित उपयोग का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
अब निगाह सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर है। क्या सरकार टेंडर की शर्तों और पूरी प्रक्रिया को अदालत के सामने उचित ठहरा पाएगी, या फिर इसमें बदलाव की जरूरत पड़ेगी?
बड़ा सवाल: करोड़ों रुपये की सार्वजनिक खरीद में नियम और प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी—इसका जवाब अब अदालत में सरकार के पक्ष से सामने आएगा।

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