विदेश में पढ़ाई का सपना होगा साकार, एससी-एसटी छात्रों को 25 लाख तक मदद


भुवनेश्वर। आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए ओडिशा सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की सरकार ने विदेश में उच्च शिक्षा के लिए ‘विदेश शिक्षावृत्ति’ छात्रवृत्ति योजना शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत पात्र छात्रों को दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।



योजना का उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाई नहीं कर पाते। सरकार के अनुसार सहायता में शिक्षण शुल्क के साथ रहने-खाने का खर्च, यात्रा, स्वास्थ्य बीमा और पढ़ाई से जुड़े अन्य जरूरी खर्च शामिल होंगे।


हर साल 50 छात्रों का चयन


योजना के तहत हर वर्ष 50 छात्रों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में शीर्ष 200 में शामिल विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और शोध सुविधाओं तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।


सरकार की इस घोषणा को सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। खासकर विदेश में पढ़ाई की भारी लागत के कारण जिन छात्रों के लिए प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना मुश्किल होता है, उनके लिए यह सहायता बड़ी राहत साबित हो सकती है।


ऐसे समय में जब देश में आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर बहस जारी है, ओडिशा की यह पहल शिक्षा के माध्यम से वंचित वर्गों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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