नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के दायरे को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने अनिवार्य ईपीएफ और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 15,000 से 25,000 रुपये तक मूल वेतन (बेसिक वेतन व महंगाई भत्ता) पाने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से पीएफ और पेंशन योजना के दायरे में लाया जाएगा। इससे लाखों निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभ का अधिकार मिलेगा।
हालांकि, इस बदलाव के बाद कर्मचारियों के वेतन से पीएफ अंशदान कटेगा, जिससे हाथ में मिलने वाला वेतन कुछ कम हो सकता है। दूसरी ओर, उनके भविष्य निधि खाते में अधिक बचत जमा होगी और कर्मचारी पेंशन योजना का लाभ भी मिलेगा। वहीं नियोक्ताओं के लिए भी अधिक कर्मचारियों पर पीएफ अंशदान देना अनिवार्य हो जाएगा।
फिलहाल यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है। प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही लागू किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, इसके 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अंतिम तिथि सरकार ही तय करेगी।

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