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2027 में मुंबई को मिलेंगी 238 नई मेट्रो जैसी लोकल ट्रेनें, 2030 तक पूरी व्यवस्था बदलने का लक्ष्य




मुंबई। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली उपनगरीय रेल सेवा को अब मेट्रो जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि 2027 से मुंबई में 238 नई मेट्रो जैसी लोकल ट्रेनों की शुरुआत का लक्ष्य है, जबकि मार्च 2030 तक पूरी उपनगरीय लोकल व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में काम किया जाएगा।


इन 238 ट्रेनों में 12-12 डिब्बों वाली रेक होंगी। परियोजना के लिए करीब 19,293 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। नई ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे चलती ट्रेन में दरवाजे पर लटककर यात्रा करने और गिरने जैसी दुर्घटनाओं का जोखिम कम होने की उम्मीद है।


रेलवे ने इन ट्रेनों के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के लिए उत्पादन को तीन रेल कारखानों में बांटने का फैसला किया है। पहली रेक 2027 में मिलने की उम्मीद है और पूरी 238 रेक 2030 तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।


फिलहाल मुंबई की सेंट्रल और पश्चिम रेलवे पर प्रतिदिन 3,234 उपनगरीय सेवाएं चल रही हैं। रेलवे के अनुसार नई रेक का इस्तेमाल किस मार्ग पर और कितनी संख्या में किया जाएगा, यह उपलब्ध रेल पथ, ट्रैक क्षमता, रखरखाव सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा।


नई ट्रेनों का मतलब केवल वातानुकूलित और आधुनिक कोच नहीं है। असली चुनौती मुंबई की भारी यात्री भीड़ के बीच समय पर सेवा, पर्याप्त फेरे, प्लेटफॉर्म क्षमता और सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था सुनिश्चित करना होगी। यदि नई रेक के साथ इन सुविधाओं का विस्तार भी समय पर हुआ, तभी 2030 तक मुंबई की लोकल सेवा को वास्तव में मेट्रो जैसी बनाने का लक्ष्य जमीन पर दिखाई देगा।


बड़ा सवाल यही है—238 नई ट्रेनें आने के बाद क्या मुंबईकरों की रोजाना की भीड़ और यात्रा का समय भी कम होगा, या केवल लोकल का चेहरा बदलेगा?

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