बैगा अंचल में 19 मौतों का दावा, सरकारी रिकॉर्ड में 8; राशन और इलाज पर बड़े सवाल

 

बालाघाट। जिले के बिरसा विकासखंड के बैगा बहुल गांवों में बच्चों की मौत और गंभीर बीमारी का मामला अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सरकारी निगरानी और पोषण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय पड़ताल में बोंदारी, कुंडेकसा, मछुरदा, मातला और कोरका जैसे गांवों में कुपोषित और बीमार बच्चों की स्थिति सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई परिवारों को महीनों से घर ले जाने वाला पोषण आहार नहीं मिला।



सबसे गंभीर दावा 19 बच्चों की मौत का है। यह आंकड़ा विपक्ष और स्थानीय स्तर पर सामने आया है, जबकि जिला स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल 8 मौतों की पुष्टि की है। कलेक्टर कुमार सत्यम ने भी कहा है कि सभी 19 मौतों को हाल की बीमारी से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि कुछ मौतें पुरानी हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौतों की वास्तविक संख्या कितनी है और प्रत्येक मामले में मृत्यु का प्रमाणित कारण क्या था?


मातला और मछुरदा में छह मौतों के सरकारी अभिलेख में दर्ज नहीं होने का दावा भी जांच का विषय है। वहीं जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों के भर्ती होने और प्रभावित गांवों में घर-घर स्वास्थ्य जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने पेयजल स्रोतों की सफाई, हाथपंपों के आसपास स्वच्छता और पानी में क्लोरीन डालने के निर्देश दिए हैं।


इस मामले का एक अहम पहलू पोषण आहार की आपूर्ति व्यवस्था भी है। मध्यप्रदेश विधानसभा के सरकारी अभिलेख में बालाघाट में पोषण आहार के परिवहन को लेकर पहले शिकायतें और निविदा संबंधी समस्याएं दर्ज हो चुकी हैं। वर्ष 2025-26 में निविदा असफल होने के बाद पुनः प्रक्रिया चलने की जानकारी सरकार ने दी थी।


अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर हर मौत का चिकित्सकीय सत्यापन, पोषण आहार वितरण का गांववार हिसाब, पानी की जांच और बच्चों की स्वतंत्र स्वास्थ्य जांच कराने की है। 19 हो या 8—हर मौत के पीछे एक परिवार है, और हर सवाल का जवाब सरकारी अभिलेखों में साफ दिखाई देना चाहिए।

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