जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर से की गई करीब 17 लाख रुपये की वसूली वापस नहीं किए जाने पर पुलिस विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि तय अवधि में राशि वापस नहीं की गई तो डीजीपी कैलाश मकवाना समेत संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को 28 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
मामला सेवानिवृत्त महिला सब-इंस्पेक्टर लजवर खानम से जुड़ा है। उनके वेतन से करीब 17 लाख रुपये की राशि की वसूली की गई थी। याचिका में आरोप था कि अदालत के निर्देश के बावजूद अब तक यह रकम वापस नहीं की गई। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को राशि लौटाने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
अदालत के सख्त रुख का संदेश साफ है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी से की गई ऐसी वसूली और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में देरी को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि महिला अधिकारी को पूरी राशि वापस की गई या नहीं।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहले भी ऐसे मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों से की गई वसूली को अनुचित मान चुका है। अप्रैल 2026 के एक मामले में अदालत ने सेवानिवृत्ति के बाद की गई वसूली को रद्द करते हुए पहले से काटी गई राशि वापस करने का आदेश दिया था।
**अब सवाल पुलिस विभाग की जवाबदेही का है—क्या चार सप्ताह में 17 लाख रुपये वापस होंगे, या 28 सितंबर को वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत के सामने जवाब देना पड़ेगा?**

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