नई दिल्ली। एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने रोजगार और कौशल विकास पर प्रस्तुति देते हुए दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देश में 17 करोड़ से अधिक नए रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में बेरोजगारी दर घटकर 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है और कौशल विकास योजनाओं ने युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।
हालांकि रोजगार के आंकड़ों को लेकर बहस जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रोजगार की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इनमें कितने स्थायी, कितने अस्थायी, कितने स्वरोजगार और कितने औपचारिक क्षेत्र के रोजगार हैं। श्रम भागीदारी, युवाओं की नौकरी की गुणवत्ता और वास्तविक आय जैसे मानकों पर भी विस्तृत विश्लेषण आवश्यक है।
सरकार का कहना है कि कौशल विकास, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जबकि विपक्ष इन दावों के स्वतंत्र और विस्तृत सत्यापन की मांग कर रहा है।

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