खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों पर किए जाने वाले ‘100 प्रतिशत’ दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की सख्ती अब कई कंपनियों तक पहुंच गई है। नियामक की कार्रवाई के बाद एमामी, एमवे इंडिया, बॉन बिस्किट्स, एपिस इंडिया, जुजा फूड्स और मास्टरचॉव फूड्स समेत कई कंपनियों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग, वेबसाइट और प्रचार सामग्री से ऐसे दावे हटाने शुरू कर दिए हैं।
एमामी के झंडू हनी को लेकर भी लेबल और प्रचार सामग्री में बदलाव किया गया है। यानी मामला केवल डाबर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाद्य क्षेत्र की दूसरी कंपनियां भी अब अपने उत्पादों पर लिखे दावों की समीक्षा कर रही हैं।
एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों के लिए ‘100 प्रतिशत’ शब्द मौजूदा नियमों में परिभाषित नहीं है। ऐसे दावे उपभोक्ताओं के मन में पूर्ण शुद्धता या श्रेष्ठता की धारणा पैदा कर सकते हैं और उन्हें गुमराह कर सकते हैं। प्राधिकरण ने कंपनियों को दावों को सत्य, स्पष्ट, अर्थपूर्ण और गैर-भ्रामक रखने की हिदायत दी है।
इससे पहले अगस्त में एफएसएसएआई ने डाबर के कई उत्पादों पर ‘100 प्रतिशत प्राकृतिक’, ‘100 प्रतिशत शुद्ध’ और इसी तरह के दावों को लेकर रोक का आदेश दिया था। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और अगली सुनवाई 24 अगस्त के लिए निर्धारित की गई थी।
एफएसएसएआई की कार्रवाई का संदेश साफ है—अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, उसके विज्ञापन और पैकेजिंग पर लिखे हर बड़े दावे का आधार भी महत्वपूर्ण होगा।

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