भाजपा पार्षद राजेंद्र राठौर बोले—हर काम की हो उच्चस्तरीय जांच, महापौर भी उठा चुके हैं जांच की मांग
इंदौर। स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर इंदौर में हुए हजारों करोड़ रुपये के काम अब सवालों के घेरे में हैं। भाजपा पार्षद और महापौर परिषद सदस्य राजेंद्र राठौर ने परियोजना में करीब ₹1000 करोड़ के भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि कई कामों में गुणवत्ता से समझौता हुआ और बाहरी कंपनियों को ठेके देकर शहर के स्थानीय ठेकेदारों की क्षमता की अनदेखी की गई।
राठौर इससे पहले भी स्मार्ट सिटी के कामों को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों को शिकायत भेज चुके हैं। उन्होंने नेहरू पार्क के निर्माण में करीब ₹8 करोड़ के काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। शिकायत में फाउंटेन खराब होने, पाइपलाइन जाम होने, टाइल्स टूटने, बिजली व्यवस्था खराब होने और हरियाली वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कंक्रीट निर्माण जैसे आरोप लगाए गए थे।
मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार नवंबर 2020 तक स्मार्ट सिटी परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹5,099.62 करोड़ बताई गई थी। वहीं नवंबर 2021 तक स्मार्ट सिटी अनुदान मद से इंदौर में ₹867.05 करोड़ खर्च होने की जानकारी विधानसभा में दी गई थी।
ठेका प्रक्रिया भी जांच का विषय बन सकती है। एक मामले में उच्च न्यायालय के सामने स्मार्ट सिटी के जल एवं सीवरेज कार्य से जुड़ी निविदा प्रक्रिया पर विवाद पहुंचा था। इसके अलावा तीर्थ गोपीकॉन से जुड़े मामलों में फर्जी बैंक गारंटी की सीबीआई जांच का भी उल्लेख सामने आया है; हालांकि इसे राठौर के मौजूदा ₹1000 करोड़ के आरोप का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि काम गुणवत्तापूर्ण थे तो स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच से डर कैसा? जांच में प्रत्येक परियोजना की निविदा, ठेकेदार, भुगतान, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण और पूर्णता प्रमाणपत्र सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
बौद्धिक प्रतिकार की पड़ताल का सवाल: स्मार्ट सिटी में कितना पैसा आया, किस काम पर कितना खर्च हुआ और किस ठेकेदार को कितना भुगतान किया गया—क्या पूरा हिसाब जनता के सामने आएगा?

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