पुरी/अहमदाबाद। भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथ यात्रा शुक्रवार को पूरे श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में प्रारंभ हुई। ओडिशा के पुरी धाम से लेकर गुजरात के अहमदाबाद तक "जय जगन्नाथ" के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। लाखों श्रद्धालुओं ने रथों के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना और रथों की रस्सियां खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
पुरी में परंपरागत वैदिक विधि-विधान के साथ रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। सबसे पहले गजपति महाराज ने स्वर्ण झाड़ू से रथों की प्रतीकात्मक सफाई कर "छेरा पहंरा" की प्राचीन परंपरा निभाई। इसके बाद भगवान के रथों को श्रद्धालुओं ने खींचना शुरू किया। तीनों रथ गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान कर गए, जहां भगवान कुछ दिनों तक विराजमान रहेंगे।
उधर अहमदाबाद में भी भगवान जगन्नाथ की 149वीं पारंपरिक रथ यात्रा अत्यंत भव्य रूप में निकली। यात्रा में सजे-धजे हाथी, अखाड़ों के हैरतअंगेज प्रदर्शन, भजन-कीर्तन मंडलियां और झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए सुबह से ही डटे रहे।
रथ यात्रा को लेकर दोनों शहरों में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए। बड़ी संख्या में पुलिस, अर्धसैनिक बल, त्वरित कार्रवाई दल और निगरानी तंत्र तैनात रहा। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की गई, जबकि चिकित्सा और आपदा राहत दल भी पूरी तरह सतर्क रहे।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, भाईचारे और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक मानी जाती है। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अवसर पर भगवान से सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

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