पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज, ब्याज का बढ़ता बोझ और विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर
प्रणव बजाज
भोपाल। मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य द्वारा लिए गए नए ऋण का लगभग 29.43 प्रतिशत हिस्सा पुराने ऋण के भुगतान में खर्च हुआ। साथ ही पिछले दस वर्षों में राज्य का आंतरिक ऋण लगभग 298 प्रतिशत बढ़ने की बात भी सामने आई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि ब्याज भुगतान का बोझ लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व वृद्धि और वित्तीय अनुशासन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में विकास योजनाओं के लिए संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
विपक्ष ने इन आंकड़ों को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का पक्ष है कि विकास कार्यों और आधारभूत संरचना के विस्तार के लिए ऋण लेना एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है और राज्य की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है।
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल
क्या मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां नया कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुकाने की प्रवृत्ति भविष्य में विकास की गति को प्रभावित कर सकती है? सीएजी रिपोर्ट ने इस विषय पर गंभीर बहस की आवश्यकता जरूर पैदा की है।

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