संघर्ष से शिखर तक हरजिंदर कौर की प्रेरक कहानी, मेहनत ने बदली तकदीर
ग्लास्गो।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाली भारतीय भारोत्तोलक Harjinder Kaur की सफलता केवल खेल की जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। कभी पंजाब के गांव में परिवार की मदद के लिए खेतों में चारा काटने वाली हरजिंदर आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा ऊंचा कर रही हैं।
हरजिंदर ने बताया कि बचपन में रोजाना खेतों में मेहनत करना, पशुओं के लिए चारा काटना और घर के कामों में हाथ बंटाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। यही कठिन परिश्रम उनके शरीर की ताकत और मानसिक मजबूती की नींव बना। बाद में इसी ताकत को उन्होंने भारोत्तोलन में ढाल दिया।
आर्थिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद हरजिंदर ने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। कठिन अभ्यास, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक अपनी पहचान बनाई।
ग्लास्गो में रजत पदक जीतने के बाद हरजिंदर ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों की है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखती हैं। उन्होंने कहा कि यह पदक उन्हें आगे और बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा।
हरजिंदर कौर की यह कहानी बताती है कि मजबूत हाथ केवल जिम में नहीं बनते, कई बार वे खेतों की मिट्टी, पसीने और संघर्ष से भी तैयार होते हैं। यही संघर्ष आज भारत के लिए रजत पदक में बदल गया।

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