मध्य प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मामले की जांच पूरी होने से पहले गांवों में मुनादी कराए जाने पर सरकार के भीतर ही असंतोष उभर आया है। छह मंत्रियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है
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मामला क्या है?
प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र की वैधता को चुनौती देने वाली शिकायत पर राज्य स्तरीय जांच समिति सुनवाई कर रही है। जांच के दौरान उनके पैतृक गांव और ससुराल क्षेत्र में ढोल पिटवाकर लोगों से जानकारी और आपत्तियां मांगी गईं। इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
छह मंत्री क्यों नाराज़?
रिपोर्टों के अनुसार, कई मंत्रियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह सार्वजनिक मुनादी कराना असामान्य प्रक्रिया है और इससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि यदि किसी अधिकारी ने नियमों से हटकर कार्रवाई की है तो उसकी जवाबदेही तय की जाए।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक ओर जाति प्रमाण-पत्र की निष्पक्ष जांच पूरी कराना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया कानून और स्थापित नियमों के अनुरूप हो। यदि प्रक्रिया पर ही सवाल उठेंगे, तो अंतिम निर्णय भी विवादों में घिर सकता है।
आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, जांच समिति आने वाले दिनों में अपना निर्णय दे सकती है। यदि प्रमाण-पत्र वैध पाया जाता है तो विवाद समाप्त हो सकता है, जबकि विपरीत स्थिति में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है। साथ ही, मुनादी कराने की प्रक्रिया पर भी सरकार अलग से निर्णय ले सकती है।
ध्यान दें: अभी जांच जारी है। प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर अंतिम निर्णय संबंधित जांच समिति द्वारा दिया जाना बाकी है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी।

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