मध्य प्रदेश में ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से वीबी-जी रामजी (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन–ग्रामीण) योजना के लिए बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। नई वित्तीय व्यवस्था के तहत राज्य में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रावधान का अनुमान है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आधारभूत ढांचे और आजीविका गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह योजना केंद्र सरकार के नए ग्रामीण रोजगार मॉडल का हिस्सा है, जिसने पहले की व्यवस्था का स्थान लिया है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 125 दिनों तक रोजगार की कानूनी गारंटी, डिजिटल निगरानी, समय पर भुगतान और ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का दावा है कि इस योजना से जल संरक्षण, ग्रामीण सड़कें, सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण, कृषि से जुड़े कार्यों और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी। साथ ही, तकनीक आधारित निगरानी और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था से कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
हालांकि, योजना को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। विपक्ष का आरोप है कि यह व्यवस्था पूर्व ग्रामीण रोजगार मॉडल के अधिकारों को कमजोर कर सकती है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य रोजगार के साथ-साथ स्थायी ग्रामीण विकास और आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।

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