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बिना डांटे, बिना चिल्लाए! जापान में बच्चों को ऐसे सिखाया जाता है अनुशासन, पूरी दुनिया करती है सराहना

 

नई दिल्ली। बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए डांटना या सज़ा देना ही एकमात्र तरीका नहीं है। जापान में पालन-पोषण की ऐसी परंपरा है, जहां बच्चों को बचपन से ही जिम्मेदारी, आत्म-अनुशासन और दूसरों के प्रति सम्मान का महत्व सिखाया जाता है। यही वजह है कि जापानी बच्चों के व्यवहार और अनुशासन की दुनिया भर में सराहना होती है।


जापानी पालन-पोषण की खास बातें

उदाहरण देकर सिखाना

जापानी अभिभावक बच्चों को केवल उपदेश नहीं देते, बल्कि अपने व्यवहार से सही आदतों का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

जिम्मेदारी की भावना

स्कूलों में बच्चे अपनी कक्षा की सफाई स्वयं करते हैं। इससे उनमें श्रम का सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

गलती पर बातचीत

बच्चे से गलती होने पर उसे डांटने के बजाय शांतिपूर्वक समझाया जाता है कि उसके व्यवहार का दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ा।

समूह की भावना

बच्चों को सिखाया जाता है कि वे केवल अपने बारे में नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज के बारे में भी सोचें।

नियमित दिनचर्या

समय पर उठना, पढ़ाई करना, खेलना और सोना—नियमित दिनचर्या को अनुशासन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

माता-पिता के लिए सीख

बच्चों से सम्मानपूर्वक बात करें।

छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दें।

अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करें।

गलती पर गुस्से के बजाय समझाने का तरीका अपनाएं।

धैर्य और निरंतरता बनाए रखें।

हर देश की संस्कृति और पारिवारिक परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए किसी एक देश की पद्धति को पूरी तरह अपनाने के बजाय, उसके सकारात्मक पहलुओं को अपनी परिस्थितियों के अनुसार अपनाना अधिक उपयोगी हो सकता है।

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