नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव होना सामान्य बात है, लेकिन हर तनाव को सामान्य मान लेना खतरनाक हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई लोग एंग्जायटी (चिंता विकार) को रोजमर्रा का तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक तनाव (स्ट्रेस) किसी काम का दबाव, परीक्षा, नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों जैसी परिस्थितियों के कारण होता है और स्थिति सामान्य होने पर अक्सर कम हो जाता है। वहीं एंग्जायटी में बिना किसी स्पष्ट कारण के भी लगातार डर, घबराहट, बेचैनी और नकारात्मक विचार बने रह सकते हैं। यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है और व्यक्ति की दिनचर्या, कामकाज तथा रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि एंग्जायटी के दौरान दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक पसीना आना, नींद न आना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और हर समय अनहोनी की आशंका जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चिंता और घबराहट कई सप्ताह तक लगातार बनी रहे या दैनिक जीवन पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना जरूरी है। समय पर पहचान, उचित परामर्श, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन की आदतें एंग्जायटी से राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं।

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