इंदौर। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में प्लॉट विवाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार पहले दर्ज एनसीआर (अदम चेक) में दो व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है, जबकि बाद में दर्ज एफआईआर में केवल एक आरोपी का नाम दिखाई दे रहा है। इस अंतर को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
दस्तावेजों के अनुसार 26 जुलाई को शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्लॉट पर सफाई के दौरान विवाद हुआ, जिसके बाद गाली-गलौज और मारपीट की घटना हुई। शिकायत में कथित रूप से योगेंद्र राठौर और गोविंद उर्फ गोल्डी का उल्लेख किया गया।
बाद में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 115(2), 296ए और 351(3) के तहत एफआईआर दर्ज की। उपलब्ध एफआईआर दस्तावेज में आरोपी के रूप में केवल गोविंद उर्फ गोल्डी का नाम दर्ज दिखाई देता है, जबकि योगेंद्र राठौर का नाम नहीं है।
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार थाना प्रभारी का कहना है कि घटना के समय योगेंद्र राठौर मौके पर मौजूद नहीं थे, इसलिए उनका नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया। दूसरी ओर शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने अपनी शिकायत में दोनों व्यक्तियों के नाम दिए थे। वहीं संबंधित पक्ष का भी अपना अलग पक्ष सामने आया है।
उठ रहे हैं ये अहम सवाल
यदि एनसीआर में दो नाम थे तो एफआईआर में एक नाम क्यों रह गया?
क्या जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले?
क्या किसी गवाह के बयान के आधार पर नाम हटाया गया?
क्या नाम हटाने का कारण केस डायरी में दर्ज है?
क्या शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी दी गई?
रिपोर्ट में वर्ष 2024 के एक पुराने प्रकरण का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें योगेंद्र राठौर के विरुद्ध अलग मामले में एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई है। हालांकि, उसका इस मामले की जांच से सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
महत्वपूर्ण: इस मामले में किसी भी प्रकार की अनियमितता या दोष सिद्ध नहीं हुआ है। नामों में अंतर के कारणों का अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल यह मामला जांच और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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