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खाली होती कुर्सियां, बढ़ता प्रशासनिक संकट!

 

खाली होती कुर्सियां, बढ़ता प्रशासनिक संकट! 


अगले पांच साल में 221 वरिष्ठ अफसर होंगे रिटायर, शासन की रफ्तार पर बड़ा सवाल

प्रणव बजाज

मध्य प्रदेश में प्रशासनिक ढांचा दबाव में, आईएएस-आईपीएस-आईएफएस अधिकारियों की भारी कमी से फैसलों और विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर


मध्य प्रदेश आने वाले पांच वर्षों में गंभीर प्रशासनिक चुनौती का सामना करने जा रहा है। एक ओर प्रदेश की आबादी, जिले, योजनाएं और सरकारी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नौकरशाहों की संख्या तेजी से घटने वाली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 से 2030 के बीच 221 अखिल भारतीय सेवा (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यदि समय पर नई नियुक्तियां और कैडर विस्तार नहीं हुआ तो शासन व्यवस्था पर इसका सीधा असर दिखाई देगा।

सबसे अधिक चिंता भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) को लेकर है। प्रदेश के लिए स्वीकृत कैडर 459 अधिकारियों का है, लेकिन वास्तविक रूप से प्रदेश में कार्यरत अधिकारियों की संख्या इससे काफी कम है। कई अधिकारी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में जिलों, विभागों और प्रमुख परियोजनाओं का संचालन सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है

अगले पांच वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में 95 आईएएस, 86 आईपीएस और 40 आईएफएस अधिकारी शामिल हैं। वर्ष 2026 में 14 आईएएस, 16 आईपीएस और 6 आईएफएस अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद हर वर्ष यह संख्या बढ़ती जाएगी, जिससे अनुभवी नेतृत्व की कमी और अधिक महसूस होगी।

प्रदेश में पिछले वर्षों में नए जिले, नए विभाग, औद्योगिक परियोजनाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इसके बावजूद अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। परिणामस्वरूप कई अधिकारी एक साथ दो-दो और तीन-तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी होने और निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों का भी मानना है कि राज्यों की बढ़ती आबादी, प्रशासनिक जरूरतों और कार्यभार के अनुसार समय-समय पर कैडर की समीक्षा होना आवश्यक है। यदि केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते भर्ती, पदोन्नति और कैडर विस्तार की प्रक्रिया तेज नहीं की तो आने वाले वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है

बड़ी बातें

अगले पांच वर्षों में 221 वरिष्ठ अधिकारी होंगे सेवानिवृत्त।

इनमें 95 आईएएस, 86 आईपीएस और 40 आईएफएस शामिल।

आईएएस कैडर की स्वीकृत संख्या 459, लेकिन वास्तविक उपलब्धता कम।

कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर, अनेक महत्वपूर्ण पद रिक्त।

नए जिले और योजनाएं बढ़ीं, लेकिन अधिकारियों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

विशेषज्ञों ने कैडर समीक्षा और शीघ्र भर्ती की आवश्यकता बताई।

तीखा सवाल

अगर सरकार की योजनाएं बढ़ रही हैं, तो उन्हें लागू करने वाले अफसर क्यों घट रहे हैं? क्या प्रशासनिक मशीनरी आने वाले वर्षों के दबाव के लिए तैयार है?

अगले पांच साल में 221 वरिष्ठ अफसर होंगे रिटायर, शासन की रफ्तार पर बड़ा सवाल

प्रणव बजाज

मध्य प्रदेश में प्रशासनिक ढांचा दबाव में, आईएएस-आईपीएस-आईएफएस अधिकारियों की भारी कमी से फैसलों और विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

मध्य प्रदेश आने वाले पांच वर्षों में गंभीर प्रशासनिक चुनौती का सामना करने जा रहा है। एक ओर प्रदेश की आबादी, जिले, योजनाएं और सरकारी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नौकरशाहों की संख्या तेजी से घटने वाली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 से 2030 के बीच 221 अखिल भारतीय सेवा (आईएएस, आईपीएस और आईएफएस) अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यदि समय पर नई नियुक्तियां और कैडर विस्तार नहीं हुआ तो शासन व्यवस्था पर इसका सीधा असर दिखाई देगा।

सबसे अधिक चिंता भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) को लेकर है। प्रदेश के लिए स्वीकृत कैडर 459 अधिकारियों का है, लेकिन वास्तविक रूप से प्रदेश में कार्यरत अधिकारियों की संख्या इससे काफी कम है। कई अधिकारी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं, जबकि कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में जिलों, विभागों और प्रमुख परियोजनाओं का संचालन सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।

अगले पांच वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में 95 आईएएस, 86 आईपीएस और 40 आईएफएस अधिकारी शामिल हैं। वर्ष 2026 में 14 आईएएस, 16 आईपीएस और 6 आईएफएस अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद हर वर्ष यह संख्या बढ़ती जाएगी, जिससे अनुभवी नेतृत्व की कमी और अधिक महसूस होगी।

प्रदेश में पिछले वर्षों में नए जिले, नए विभाग, औद्योगिक परियोजनाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा योजनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इसके बावजूद अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। परिणामस्वरूप कई अधिकारी एक साथ दो-दो और तीन-तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी होने और निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों का भी मानना है कि राज्यों की बढ़ती आबादी, प्रशासनिक जरूरतों और कार्यभार के अनुसार समय-समय पर कैडर की समीक्षा होना आवश्यक है। यदि केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते भर्ती, पदोन्नति और कैडर विस्तार की प्रक्रिया तेज नहीं की तो आने वाले वर्षों में प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

बड़ी बातें

अगले पांच वर्षों में 221 वरिष्ठ अधिकारी होंगे सेवानिवृत्त।

इनमें 95 आईएएस, 86 आईपीएस और 40 आईएफएस शामिल।

आईएएस कैडर की स्वीकृत संख्या 459, लेकिन वास्तविक उपलब्धता कम।

कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर, अनेक महत्वपूर्ण पद रिक्त।

नए जिले और योजनाएं बढ़ीं, लेकिन अधिकारियों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

विशेषज्ञों ने कैडर समीक्षा और शीघ्र भर्ती की आवश्यकता बताई।

तीखा सवाल

अगर सरकार की योजनाएं बढ़ रही हैं, तो उन्हें लागू करने वाले अफसर क्यों घट रहे हैं? क्या प्रशासनिक मशीनरी आने वाले वर्षों के दबाव के लिए तैयार है?

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