इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस छात्र आंदोलन का हवाला दिया जा रहा है, उससे कांग्रेस का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और वह केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से बाद में सक्रिय हुई।
पत्रकारों से बातचीत में विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि आंदोलन छात्रों ने चलाया, जबकि कांग्रेस बाद में उसे अपना बताकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती रही। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "यदि पड़ोसी के घर बच्चा पैदा हो जाए और कांग्रेस ढोल बजाने लगे, तो उसमें उसकी क्या भूमिका होगी?" उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई के बाद कांग्रेस केवल राजनीतिक अवसर तलाशने मैदान में उतरी।
'विदेशी ताकतें अस्थिरता फैलाना चाहती थीं'
विजयवर्गीय ने दावा किया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी अस्थिर परिस्थितियां पैदा करना चाहती थीं, लेकिन उनके प्रयास सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता की समझदारी के कारण ऐसे मंसूबे नाकाम रहे।
'विपक्ष को नया राजनीतिक मुद्दा मिला'
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद विपक्ष राजनीतिक रूप से निराश था और इस घटनाक्रम में उसे नया मुद्दा मिल गया। विजयवर्गीय के अनुसार, कांग्रेस ने आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया, बल्कि बाद में उससे जुड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।
राहुल गांधी को दी नसीहत
राहुल गांधी के आरएसएस संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में अनुशासन, संगठन और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में आरएसएस के स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
'धर्मेंद्र प्रधान अनुशासित कार्यकर्ता हैं'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान की प्रशंसा करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि वे उन्हें विद्यार्थी परिषद के समय से जानते हैं और हमेशा जिम्मेदार एवं अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में देखा है। उनके अनुसार, आंदोलन शुरू होने के बाद ही धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि यदि संगठन उचित समझे तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। बाद में पार्टी के सामूहिक निर्णय के अनुरूप उन्होंने पद छोड़ दिया। विजयवर्गीय ने कहा कि सच्चा कार्यकर्ता वही होता है जो पद से ऊपर संगठन और राष्ट्रहित को रखता है।
(नोट: इस समाचार में व्यक्त आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां कैलाश विजयवर्गीय के सार्वजनिक बयान पर आधारित हैं।)

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