नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जो हाल के महीनों का ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, परिवहन लागत और कई उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल उत्पादक देशों की रणनीति पर बाजार की नजर रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक महंगाई तथा आर्थिक वृद्धि पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

Post a Comment