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नेशनल मैंगो डे: क्यों पड़ा आम का नाम ‘चौसा’ और ‘लंगड़ा’? जानिए दिलचस्प इतिहास

 

हर साल 22 जुलाई को नेशनल मैंगो डे मनाया जाता है। आम को फलों का राजा कहा जाता है और यह भारत का राष्ट्रीय फल भी है। देश में इसकी सैकड़ों किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन चौसा और लंगड़ा सबसे लोकप्रिय किस्मों में शामिल हैं। इनके नामों के पीछे भी रोचक इतिहास छिपा है।



कहा जाता है कि चौसा आम का नाम बिहार के बक्सर जिले के चौसा क्षेत्र से पड़ा। इतिहासकारों के अनुसार, 1539 में शेरशाह सूरी ने हुमायूं को चौसा के युद्ध में हराया था। इस क्षेत्र के स्वादिष्ट आम से प्रभावित होकर इस किस्म को "चौसा" नाम मिला, जो समय के साथ पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया।


वहीं लंगड़ा आम के नाम को लेकर एक दिलचस्प लोककथा प्रचलित है। माना जाता है कि वाराणसी में एक लंगड़े किसान के बगीचे में इस किस्म का पेड़ था। उसके बगीचे के आम इतने स्वादिष्ट थे कि लोग उन्हें "लंगड़े का आम" कहने लगे और बाद में यही नाम "लंगड़ा" के रूप में प्रसिद्ध हो गया। हालांकि, इस नाम के पीछे कोई आधिकारिक ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे लोकमान्यता माना जाता है।


भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है। दशहरी, अल्फांसो, केसर, तोतापुरी, सफेदा, मालदा और हिमसागर जैसी कई प्रसिद्ध किस्में देश के अलग-अलग हिस्सों में उगाई जाती हैं।


आम स्वाद के साथ-साथ विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। हालांकि, इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।

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