अमेरिका से समझौते के बाद तेज हुआ सत्ता संघर्ष, विदेश मंत्री भी निशाने पर
तेहरान। अमेरिका के साथ हालिया समझौते के बाद ईरान में राजनीतिक टकराव गहरा गया है। देश के कट्टरपंथी गुटों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कई वरिष्ठ नेताओं पर इस्लामिक गणराज्य की व्यवस्था के खिलाफ 'सॉफ्ट तख्तापलट' की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि सरकार की हालिया कूटनीतिक पहल और अमेरिका के साथ बढ़ता संवाद ईरान की पारंपरिक नीतियों और क्रांतिकारी मूल्यों को कमजोर कर सकता है। वहीं, सरकार समर्थक वर्ग का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत पाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान के भीतर सुधारवादी और कट्टरपंथी धड़ों के बीच लंबे समय से चल रहे वैचारिक संघर्ष का हिस्सा भी है। आने वाले समय में इसका असर देश की आंतरिक राजनीति और नीति-निर्माण पर पड़ सकता है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी बना हुआ है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती आशंकाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक और सैन्य तनाव लगातार बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

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