नई दिल्ली। स्ट्रोक के बाद बोलने की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने नई उम्मीद जगाई है। , और के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से एक संगीत चिकित्सा (म्यूजिक थेरेपी) विकसित की है, जो स्ट्रोक के कारण प्रभावित हुई बोलने की क्षमता को सुधारने में मददगार साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के बाद कई मरीज अफेज़िया नामक समस्या से जूझते हैं, जिसमें शब्द बोलने, समझने या वाक्य बनाने में कठिनाई होती है। नई संगीत-आधारित चिकित्सा मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करने का प्रयास करती है, जो भाषा और आवाज़ से जुड़े कार्यों में मदद करते हैं।
प्रारंभिक अध्ययन में इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित चिकित्सा और पुनर्वास कार्यक्रम के साथ इस पद्धति को अपनाने से मरीजों की संवाद क्षमता में सुधार की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह उपचार पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहायक माध्यम है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के बड़े नैदानिक अध्ययन भी सफल रहते हैं, तो यह तकनीक स्ट्रोक के बाद बोलने की क्षमता खो चुके हजारों मरीजों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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