नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। संगठन और नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक केंद्रीय नेतृत्व से सीधे हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो चन्नी गुट के नेता दिल्ली जाकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर सकते हैं।
विवाद की जड़ प्रदेश संगठन में नेतृत्व, नियुक्तियों और चुनावी रणनीति को लेकर असहमति बताई जा रही है। चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन में बदलाव आवश्यक है, जबकि दूसरा पक्ष वर्तमान व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में है। यही वजह है कि पिछले कई दिनों से बैठकों का दौर जारी है, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
पंजब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने दोनों गुटों के बीच संवाद की कोशिश की है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पार्टी के भीतर सभी नेताओं की बात सुनी जाएगी, लेकिन अनुशासन से समझौता नहीं होगा। दूसरी ओर, चन्नी ने भी कहा है कि वह पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे, फिर भी उनके समर्थकों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस किसी भी कीमत पर पंजाब में गुटबाजी की छवि नहीं चाहती। यही कारण है कि अब अंतिम समाधान की जिम्मेदारी राहुल गांधी और पार्टी हाईकमान पर आ गई है। यदि समय रहते विवाद नहीं सुलझा तो इसका सीधा असर संगठन और चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती केवल दो गुटों के बीच समझौता कराने की नहीं, बल्कि पंजाब इकाई को एकजुट कर आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने की भी है। ऐसे में दिल्ली में होने वाली संभावित बैठक को पंजाब कांग्रेस के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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