धार की 'सरस्वती' निकली 'गायत्री', 3D मैपिंग ने खोला ऐतिहासिक रहस्य
धार/ इन्दौर मध्य प्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। करीब 900 वर्षों से जिस प्राचीन प्रतिमा को देवी सरस्वती की प्रतिमा माना जाता रहा, वैज्ञानिक अध्ययन और त्रि-आयामी (3D) डिजिटल मैपिंग के बाद विशेषज्ञों ने दावा किया है कि वह प्रतिमा वास्तव में देवी गायत्री की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिमा की सूक्ष्म डिजिटल स्कैनिंग और शिल्प-विज्ञान के अध्ययन में पाया गया कि इसमें वीणा का अभाव है, जबकि पारंपरिक सरस्वती प्रतिमाओं में वीणा प्रमुख पहचान मानी जाती है। प्रतिमा की अन्य संरचनात्मक विशेषताएं देवी गायत्री के स्वरूप से अधिक मेल खाती हैं। इसी आधार पर वर्षों से चली आ रही पहचान पर सवाल उठे हैं।
यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी बहस पहले से ही चर्चा में है। नई वैज्ञानिक व्याख्या ने इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। हालांकि इस निष्कर्ष पर सभी विद्वानों की सहमति होना अभी बाकी है और विषय पर आगे भी शोध जारी रहने की संभावना है।

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