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वर्दी पर दाग: सीएम हेल्पलाइन जांच के बहाने महिला से दुष्कर्म का आरोप, प्रधान आरक्षक गिरफ्तार

 

इंदौर। जनता की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाली पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण सवालों के घेरे में है। चंदन नगर थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक अंचल तिवारी को एक 43 वर्षीय महिला की शिकायत पर दुष्कर्म, धमकी और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।



सीएम हेल्पलाइन जांच से शुरू हुआ संपर्क


शिकायत के अनुसार, महिला ने किसी अन्य मामले में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसकी जांच की जिम्मेदारी प्रधान आरक्षक अंचल तिवारी को सौंपी गई। आरोप है कि जांच के दौरान आरोपी ने महिला का विश्वास जीता और खुद को परिवार जैसा बताते हुए उसके संपर्क में आया।


पीड़िता का आरोप है कि 25 दिसंबर 2024 को पति की गैरमौजूदगी में आरोपी उसके घर पहुंचा और जबरदस्ती की। विरोध करने पर उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए तथा उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण करता रहा। महिला का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उसके पति और बच्ची को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं।


पुलिस आयुक्त से शिकायत के बाद कार्रवाई


पीड़िता ने पूरी घटना अपने पति को बताई, जिसके बाद दोनों ने पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह को लिखित शिकायत दी। शिकायत के बाद जोन-4 के डीसीपी सुनील मेहता के निर्देश पर आरोपी प्रधान आरक्षक को लाइन अटैच किया गया और उसके विरुद्ध गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।


समझौते का दबाव डालने का भी आरोप


पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के शुरुआती दौर में मामले को दबाने और समझौता कराने की कोशिश हुई। उसका कहना है कि थाने में पदस्थ एक महिला अधिकारी ने दोनों पक्षों को बैठाकर समझाने का प्रयास किया। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद कार्रवाई की गई।


पुराने विवाद भी आए चर्चा में


स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि अंचल तिवारी का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। हालांकि उन मामलों में किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।


जांच के प्रमुख सवाल


क्या सीएम हेल्पलाइन की जांच की आड़ में अधिकारों का दुरुपयोग हुआ?


शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई?


क्या समझौते के प्रयासों की भी स्वतंत्र जांच होगी?


क्या पीड़िता को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है?


क्या विभाग आरोपी के पुराने आचरण की भी समीक्षा करेगा?



नोट: आरोपी के विरुद्ध दर्ज आरोपों की जांच जारी है। अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों से ही स्थापित होगा।

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