केंद्र के बजट पर अटकी पीएम ई-बस योजना, 40 में से सिर्फ 10 बसें सड़क पर; 30 बसें डिपो में खड़ी, जनता पूछ रही—आखिर कब मिलेगी सुविधा?
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शामिल इंदौर को आधुनिक और प्रदूषण-मुक्त सार्वजनिक परिवहन देने के उद्देश्य से भेजी गई प्रधानमंत्री ई-बस सेवा अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। केंद्र सरकार से संचालन के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता और बजट स्वीकृति में देरी के कारण करीब पांच महीने पहले पहुंची 40 इलेक्ट्रिक बसों में से 30 अब भी डिपो में खड़ी हैं, जबकि केवल 10 बसों का सीमित संचालन हो रहा है।
करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई इन बसों के लंबे समय तक उपयोग में नहीं आने से परियोजना की गति पर सवाल उठ रहे हैं। बसों के रखरखाव, चार्जिंग, चालक, परिचालक और संचालन व्यय के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने से योजना प्रभावित बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बसें समय पर सड़कों पर नहीं उतरीं तो उनका रखरखाव खर्च बढ़ेगा और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने का उद्देश्य भी प्रभावित होगा। दूसरी ओर शहर में रोजाना हजारों यात्री बेहतर बस सेवा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
नगर परिवहन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से आवश्यक बजट और संचालन संबंधी मंजूरी मिलते ही शेष बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़क पर उतार दिया जाएगा।
तीखा सवाल
जब बसें खरीद ली गईं, तो संचालन की व्यवस्था पहले क्यों नहीं हुई? क्या योजनाएं केवल उद्घाटन तक सीमित रह जाएंगी या जनता को समय पर उनका लाभ भी मिलेगा?

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