पंजाब में फिल्म "सतलुज" को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। ने घोषणा की है कि राज्य के हर गांव में इस फिल्म का प्रदर्शन करेगा।
फिल्म "सतलुज" का निर्देशन ने किया है। यह फिल्म के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। खालरा ने वर्ष 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित तौर पर बड़ी संख्या में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों की जांच की थी और इन घटनाओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया था।
बताया जाता है कि वर्ष 1995 में जसवंत सिंह खालरा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। बाद में इस मामले में जांच और न्यायिक कार्रवाई हुई, जिसने इसे देश के चर्चित मानवाधिकार मामलों में शामिल कर दिया।
अकाली दल का कहना है कि फिल्म का उद्देश्य पंजाब के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय से नई पीढ़ी को परिचित कराना है। वहीं, इस घोषणा के बाद फिल्म को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इसे अपने-अपने दृष्टिकोण से देख रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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