ने गर्भवती महिला आईपीएस अधिकारियों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायालय ने सवाल उठाया कि यदि कोई महिला अधिकारी चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ और ड्यूटी के लिए सक्षम है, तो उसे केवल गर्भावस्था के आधार पर प्रोबेशन प्रशिक्षण से क्यों रोका जाए?
यह मामला की याचिका से जुड़ा है। उर्वशी सेंगर ने प्रशिक्षण से वंचित किए जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मातृत्व किसी महिला अधिकारी के पेशेवर अधिकारों में बाधा नहीं बनना चाहिए। यदि मेडिकल रिपोर्ट यह बताती है कि अधिकारी प्रशिक्षण लेने के लिए पूरी तरह सक्षम है, तो उसे अवसर से वंचित करने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई आज होगी, जिसमें केंद्र सरकार से अपने रुख और संबंधित नियमों पर विस्तृत जवाब देने को कहा गया है। इस मामले का फैसला भविष्य में महिला अधिकारियों, विशेषकर गर्भवती प्रशिक्षु अधिकारियों के सेवा अधिकारों और प्रशिक्षण संबंधी नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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