बौद्धिक प्रतिकार |
विदेश में रहने वाले भारतीय (एनआरआई) यदि भारत में रहने वाले रिश्तेदारों से नकद, संपत्ति, शेयर या अन्य उपहार (गिफ्ट) प्राप्त करते हैं, तो हर मामले में उन पर टैक्स नहीं लगता। हालांकि, ऐसे लेनदेन पर आयकर कानून और विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) दोनों के नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए गिफ्ट स्वीकार करने से पहले नियमों की जानकारी होना जरूरी है।
कब नहीं लगता टैक्स?
यदि गिफ्ट आयकर कानून में परिभाषित निर्धारित रिश्तेदारों—जैसे माता-पिता, पति या पत्नी, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, संतान या अन्य निर्धारित निकट संबंधियों—से मिलता है, तो सामान्यतः उस पर कोई आयकर नहीं लगता, चाहे राशि कितनी भी हो।
कब देना पड़ सकता है टैक्स?
यदि गिफ्ट किसी गैर-रिश्तेदार से प्राप्त होता है और उसकी कुल कीमत एक वित्तीय वर्ष में ₹50,000 से अधिक हो जाती है, तो सामान्यतः पूरी राशि या संपत्ति का निर्धारित मूल्य कर योग्य हो सकता है। यह नियम नकद, कुछ प्रकार की चल संपत्ति और अचल संपत्ति पर भी लागू हो सकता है।
फेमा के नियम भी हैं महत्वपूर्ण
एनआरआई को मिलने वाले गिफ्ट केवल आयकर नियमों से ही नहीं, बल्कि फेमा के प्रावधानों के अनुसार भी होने चाहिए। धनराशि अधिकृत बैंकिंग माध्यम से भेजी जानी चाहिए। शेयर, प्रतिभूतियों या कुछ अन्य संपत्तियों के मामले में अतिरिक्त नियामकीय शर्तें लागू हो सकती हैं।
दस्तावेज संभालकर रखें
भविष्य में किसी भी जांच या स्पष्टीकरण की स्थिति से बचने के लिए इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखें—
गिफ्ट डीड (यदि लागू हो)
बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड
गिफ्ट देने वाले और प्राप्त करने वाले के संबंध का प्रमाण
संपत्ति या शेयर से जुड़े आवश्यक दस्तावेज
यदि गिफ्ट कर-मुक्त है, तब भी उचित दस्तावेज रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

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