प्रणव बजाज
एक तरफ़ मध्य प्रदेश सरकार कहती है कि खजाना खाली है, कर्ज़ लगातार बढ़ रहा है और विकास के लिए संसाधनों की कमी है। दूसरी तरफ़ करोड़ों रुपये के नए लग्ज़री बिजनेस जेट की खरीद ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि आखिर प्राथमिकता जनता है या सत्ता का वैभव?
सरकार के अपने आँकड़े बताते हैं कि प्रदेश पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज़ है। ब्याज चुकाने में ही हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद नया Bombardier Challenger 3500 विमान खरीदा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पहले कम कीमत का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में लागत बढ़ी और पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। इससे पहले भी चार्टर विमानों पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बातें विधानसभा में सामने आ चुकी हैं।
जनता पूछ रही है...
जब सरकारी स्कूलों में शिक्षक कम हैं, तब नया जेट क्यों?
जब अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी है, तब आलीशान विमान क्यों?
जब किसान भुगतान, युवा रोजगार और कर्मचारियों के मुद्दे लंबित हैं, तब सत्ता की उड़ान इतनी ज़रूरी क्यों?
व्यंग्य
सरकार कहती है— "प्रदेश आत्मनिर्भर बन रहा है।"
जनता पूछती है— "कर्ज़ भी आत्मनिर्भर हो गया क्या?"
सरकार कहती है— "विमान विकास के लिए है।"
जनता मुस्कुराती है— "विकास ज़मीन पर नहीं दिखा, इसलिए अब शायद आसमान में ढूंढना पड़े!"
सरकार कहती है— "यह प्रशासनिक आवश्यकता है।"
जनता पूछती है— "क्या जनता की आवश्यकता कभी प्रशासनिक प्राथमिकता बनेगी?"
'मौन' सबसे बड़ा जवाब?
जमीन घोटाला, तबादलों के आरोप, शराब नीति पर सवाल, बढ़ता कर्ज़, चार्टर विमानों पर खर्च और अब नया बिजनेस जेट...
हर मुद्दे पर विपक्ष सवाल पूछता है, मीडिया जवाब मांगता है और जनता हिसाब चाहती है। लेकिन सत्ता की ओर से अक्सर वही पुराना उत्तर मिलता है—मौन।
ऐसा लगता है जैसे सरकार ने नया विमान केवल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि सवालों से और ऊँचा उड़ जाने के लिए खरीदा हो।
व्यंग्य का पंच
"प्रदेश की सड़कें गड्ढों में, अस्पताल संसाधनों के इंतज़ार में, किसान भुगतान की राह में... लेकिन सत्ता का विमान रनवे पर तैयार है।
लगता है लोकतंत्र में अब जनता पैदल चलेगी और जवाब आसमान में उड़ेंगे!"

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