लावारिस शेयरों का दावा होगा आसान, एआई और डिजिटल प्रणाली से तेज होगी प्रक्रिया



बिना दावे वाले शेयर और लाभांश (डिविडेंड) वापस पाने की प्रक्रिया जल्द ही अधिक सरल और तेज हो सकती है। केंद्र सरकार इसके लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था तैयार कर रही है, जिसमें विभिन्न सरकारी मंचों को एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा विश्लेषण की मदद से निवेशकों के दावों का तेजी से सत्यापन किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को बार-बार दस्तावेज जमा करने और लंबी कागजी प्रक्रिया से राहत देना है। विभिन्न सरकारी अभिलेखों का मिलान डिजिटल माध्यम से होने पर पात्र निवेशकों की पहचान आसान होगी और शेयर या लाभांश का हस्तांतरण पहले की तुलना में कम समय में पूरा किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी दावों पर रोक लगेगी और वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी। इससे उन लाखों निवेशकों और उनके परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके शेयर या लाभांश लंबे समय से बिना दावे के पड़े हैं।

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