भीषण गर्मी अब केवल असहज मौसम नहीं रही, बल्कि नवजात शिशुओं के मस्तिष्क के विकास के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। हाल में सामने आए एक शोध में संकेत मिले हैं कि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने से जन्म लेने वाले बच्चों के मस्तिष्क के विकास और शुरुआती न्यूरोलॉजिकल कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब गर्भवती महिलाएं लंबे समय तक अत्यधिक तापमान झेलती हैं, तो भ्रूण तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास की प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन के शुरुआती हजार दिन मस्तिष्क के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान पर्यावरणीय जोखिम भविष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आए नवजातों में सीखने की क्षमता, स्मरण शक्ति और व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह संबंध जोखिम बढ़ने का संकेत देता है, इसे हर बच्चे पर लागू नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएं भीषण गर्मी के समय पर्याप्त पानी पिएं, धूप में लंबे समय तक रहने से बचें, हल्के सूती कपड़े पहनें और शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखें। किसी भी असामान्य परेशानी पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार बढ़ते तापमान के बीच यह शोध सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चेतावनी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए गर्मी से बचाव के विशेष उपायों को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

Post a Comment