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आयाम बजाज
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर तेज हुई हिंदुत्व की बहस, दोनों दल आमने-सामने
मुंबई। महाराष्ट्र में हिंदुत्व की राजनीति एक बार फिर केंद्र में आ गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रस्तावित 'राम रक्षा' आंदोलन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "हिंदुत्व कोई टी-शर्ट नहीं है, जिसे राजनीतिक सुविधा के अनुसार कभी पहन लिया जाए और कभी उतार दिया जाए।"
शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सत्ता के लिए अपने पारंपरिक हिंदुत्व के रुख से समझौता किया। उन्होंने कहा कि जब पार्टी ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ सरकार बनाई, तभी उसके मूल वैचारिक आधार पर सवाल खड़े हो गए। शिंदे ने यह भी कहा कि अब जब राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं, तब फिर से भगवान राम और हिंदुत्व की बात की जा रही है।
शिंदे का यह बयान ऐसे समय आया है जब उद्धव ठाकरे ने 'राम रक्षा' आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा है कि यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक अस्मिता से जुड़ा अभियान है। उनका दावा है कि भगवान राम और हिंदुत्व किसी एक दल की बपौती नहीं हैं और उनकी पार्टी हमेशा से बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर चलती रही है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट भाजपा के साथ सरकार में शामिल हुआ।
दोनों पक्ष लगातार यह दावा करते रहे हैं कि वही बालासाहेब ठाकरे की वास्तविक राजनीतिक विरासत और हिंदुत्व की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच हिंदुत्व का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख चुनावी विमर्श बनता दिखाई दे रहा है।
दोनों नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में अब राजनीतिक संघर्ष केवल संगठन या सत्ता का नहीं, बल्कि हिंदुत्व की वैचारिक विरासत पर भी केंद्रित होता जा रहा है।

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