महंगाई की दोहरी मार: थोक मूल्य सूचकांक में तेज उछाल, खुदरा बाजार पर भी बढ़ सकता है असर; विपक्ष ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई ने 44 महीनों का उच्चतम स्तर छू लिया है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अर्थव्यवस्था पर नए दबाव के संकेत दिए हैं। लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की रसोई से लेकर उद्योगों तक चिंता बढ़ा दी है। विपक्ष ने इसे सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता बताते हुए केंद्र पर तीखा हमला बोला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि थोक महंगाई बढ़ने का असर आने वाले महीनों में खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। यदि उत्पादन और परिवहन लागत लगातार बढ़ती रही तो दैनिक उपयोग की वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं। इससे आम परिवारों का मासिक बजट और अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या आगे की मौद्रिक नीति में सख्ती बरतने का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में नए ऋण महंगे हो सकते हैं और कुछ प्रकार के कर्ज पर ईएमआई का बोझ भी बढ़ सकता है, हालांकि यह भविष्य के नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगा।
उधर विपक्ष का आरोप है कि बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और सरकार कीमतों पर नियंत्रण रखने में विफल रही है। वहीं सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का भी महंगाई पर असर पड़ा है।

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