Top News

कच्चे तेल में फिर उबाल! 100 डॉलर की आहट से बढ़ी चिंता, क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

 

ब्रेंट 86 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 80 डॉलर के पार, वैश्विक बाजार की हलचल का असर भारत पर भी पड़ सकता है

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। इससे ऊर्जा बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि यही रुख जारी रहा तो कच्चा तेल फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है


भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आयात बिल, पेट्रोलियम कंपनियों की लागत और सरकारी वित्तीय प्रबंधन पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल पर नहीं, बल्कि कर, परिवहन लागत, विनिमय दर और विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर भी निर्भर करती हैं।

यदि वैश्विक बाजार में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल और डीजल के दामों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर माल ढुलाई, कृषि, उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, उत्पादन में बदलाव और वैश्विक मांग से जुड़ा है। यदि इन मोर्चों पर तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल संभव है।

Post a Comment

Previous Post Next Post