मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि लंबे समय से चुनाव नहीं कराने के पीछे क्या कारण हैं और छात्रसंघ चुनाव कब तक कराए जाएंगे।
याचिका में कहा गया है कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनके माध्यम से विद्यार्थियों को नेतृत्व, संगठन और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। वर्ष 2017 के बाद से चुनाव नहीं होने के कारण लाखों छात्र इस अवसर से वंचित हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि छात्रसंघ चुनावों को लेकर सरकार की वर्तमान नीति क्या है और भविष्य में इन्हें कराने की कोई समय-सीमा तय की गई है या नहीं।
अब इस मामले में राज्य सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। यदि अदालत आवश्यक निर्देश जारी करती है, तो प्रदेश के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों का रास्ता फिर से खुल सकता है।

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