भारत के प्रमुख शेयर बाजार संचालन संस्थान (एनएसई) ने ₹1491 करोड़ का निपटान शुल्क जमा कर अपने लंबित नियामकीय मामलों का समाधान कर लिया है। इस समझौते के बाद वर्षों से अटका एनएसई का आईपीओ अब आगे बढ़ने की स्थिति में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, बाजार नियामक ने समझौते की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इससे एनएसई के खिलाफ चल रहे प्रमुख नियामकीय विवाद समाप्त होने की दिशा में बढ़ गए हैं और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है।
एनएसई का आईपीओ पिछले कई वर्षों से विभिन्न कानूनी और नियामकीय कारणों से अटका हुआ था। अब समझौते के बाद कंपनी को सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया में तेजी मिलने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एनएसई इस वर्ष अपने आईपीओ के जरिए 26,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की तैयारी में है। यदि यह निर्गम तय समय पर आता है, तो यह भारत के सबसे बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (आईपीओ) में शामिल हो सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एनएसई के सूचीबद्ध होने से भारतीय पूंजी बाजार को और मजबूती मिलेगी। साथ ही निवेशकों को देश के सबसे बड़े एक्सचेंज की हिस्सेदारी खरीदने का अवसर भी प्राप्त होगा।

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