विशेष संवाददाता | इंदौर
इंदौर–अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुनारखेड़ी फाटा के पास लगभग 120 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पहली ही बारिश में सड़क की सतह उखड़ गई और कई स्थानों पर सरिया दिखाई देने लगा। अब निर्माण एजेंसी डामर के बजाय सीमेंट से गड्ढे भरती दिखाई दे रही है।
यदि ये दावे तकनीकी जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल खराब निर्माण का नहीं बल्कि सार्वजनिक धन की गुणवत्ता और जवाबदेही का भी बन सकता है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
पहली ही बारिश में सड़क क्यों उखड़ गई?
सात स्थानों पर सरिया बाहर कैसे आ गया?
पहले डामर से मरम्मत और अब सीमेंट का प्रयोग क्यों?
क्या गुणवत्ता परीक्षण (क्वालिटी कंट्रोल) नियमानुसार हुआ?
अधूरे निर्माण के बावजूद यातायात क्यों शुरू कराया गया?
क्या सीमेंट से गड्ढे भरना सही समाधान है?
सड़क निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार, बिटुमिन (डामर) सड़क पर सीमेंट से पैचवर्क सामान्य और स्थायी तकनीकी समाधान नहीं माना जाता। यदि मूल निर्माण में ही तकनीकी खामी है, तो केवल गड्ढे भरने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ऐसी स्थिति में पूरी परत की गुणवत्ता की जांच आवश्यक होती है।
यदि निर्माण में दोष मिले तो क्या कार्रवाई हो सकती है?
यदि स्वतंत्र तकनीकी जांच में निर्माण मानकों का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो संबंधित विभाग अनुबंध की शर्तों और लागू नियमों के तहत निम्न कार्रवाई कर सकता है—
ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस।
स्वतंत्र गुणवत्ता (थर्ड पार्टी) जांच।
दोषपूर्ण निर्माण को अपने खर्च पर दोबारा बनवाने का आदेश।
सुरक्षा राशि (परफॉर्मेंस गारंटी) जब्त करना।
भुगतान रोकना या रिकवरी करना।
गंभीर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया।
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच।
जरूरी है निष्पक्ष जांच
सिर्फ पैचवर्क करने से विवाद खत्म नहीं होगा। इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, निर्माण सामग्री की लैब जांच और गुणवत्ता नियंत्रण रिकॉर्ड की समीक्षा आवश्यक है। यदि करोड़ों रुपये की परियोजना पहली ही बारिश में खराब होती है, तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिम्मेदारी किसकी है और नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
नोट: वर्तमान में सड़क की गुणवत्ता को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए गए हैं। जब तक सक्षम विभाग की तकनीकी जांच पूरी नहीं होती, तब तक निर्माण में दोष या किसी ठेकेदार की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता।

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