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Twisha Sharma की रिटायर्ड जज सास गिरिबाला सिंह बनी कैदी नंबर 71, मां-बेटे को जेल में किया शिफ्ट, मिली सिर्फ थाली-कटोरी और चादरTwisha Sharma's retired judge mother-in-law, Giribala Singh, became prisoner number 71. The mother and son were shifted to jail and were given only a plate, bowl, and bedsheet

 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में Twisha Sharma सुसाइड केस अब एक नया मोड़ ले चुका है। CBI की विशेष अदालत द्वारा 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद, मृतका की सास (रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह) और पति समर्थ सिंह को भोपाल सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। जेल प्रशासन ने दोनों को बकायदा कैदी नंबर और बैरक अलॉट कर दिए हैं।


कोर्ट रूम में रो पड़ीं रिटायर्ड जज साससीबीआई की पूछताछ खत्म होने के बाद जब दोनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट शोभना भालावे की अदालत में पेश किया गया, तो वहां का माहौल काफी भावुक और नाटकीय हो गया। अपनी बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में घिरीं पूर्व जज गिरिबाला सिंह कोर्ट में ही रो पड़ीं। उन्होंने जेल जाने से ठीक पहले जज के सामने अपनी भावुक अपील भी रखी। हालांकि, सीबीआई की दलीलों को देखते हुए कोर्ट ने दोनों को 16 जून तक के लिए जेल भेज दिया।

जेल में मिला नया नाम: एक को 71 तो दूसरे को मिला 1782 नंबरजेल मैनुअल के हिसाब से अब दोनों आरोपियों की पहचान उनके नामों से नहीं बल्कि उनके नंबरों से होगी। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह, जेल रिकॉर्ड में 'आमद नंबर 71' दिया गया है। सुरक्षा कारणों और उनके पूर्व पद को देखते हुए उन्हें महिला बैरक के मेडिकल खंड में निगरानी में रखा गया है। उनके साथ बैरक में 4 अन्य महिला कैदी भी मौजूद हैं।

वहीं दूसरी ओर, ट्विशा के पति समर्थ को 'आमद नंबर 1782' का बिल्ला मिला है। उन्हें सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 4 के 'ब-खंड' (अस्पताल वार्ड) में कड़ी निगरानी में रखा गया है। इस बैरक में समर्थ के साथ 15 अन्य कैदी भी बंद हैं।

जेल से मिली सिर्फ थाली-कटोरी और चादरजेल प्रबंधन ने नियमों का पालन करते हुए पूर्व जज और उनके बेटे को वीआईपी ट्रीटमेंट न देकर आम कैदियों की तरह ही एक-एक थाली, कटोरी और ओढ़ने-बिछाने के लिए चादर दी है।

क्या है पूरा मामला?भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने वाली 33 वर्षीय पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा बीती 12 मई को अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। इस मामले में ट्विशा के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। केस की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को ही सीबीआई ने इस मामले की जांच पूरी तरह अपने हाथों में ली और नए सिरे से एफआईआर (FIR) दर्ज कर सास और पति को मुख्य आरोपी बनाया।

16 जून तक क्यों मिली न्यायिक हिरासत?सीबीआई ने कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच अभी बेहद अहम मोड़ पर है। ट्विशा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना स्थल से जब्त किए गए मोबाइल-लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक (FSL) रिपोर्ट आना अभी बाकी है। सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, इसलिए अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 जून तक के लिए जेल भेज दिया है।

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