मालदा (पश्चिम बंगाल)। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में उसके जिला कार्यालय पर मकान मालिक ने ताला लगा दिया। आरोप है कि कार्यालय का चार महीने का किराया और बिजली बिल बकाया था, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार, मकान मालिक ने कई बार बकाया भुगतान की मांग की थी, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने पर उन्होंने कार्यालय को बंद कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई और विपक्ष को टीएमसी पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया।
मकान मालिक का कहना है कि पिछले चार महीनों से किराया नहीं मिला था, जबकि बिजली बिल का भुगतान भी लंबित था। बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद मजबूर होकर कार्यालय पर ताला लगाना पड़ा।
वहीं, टीएमसी नेताओं ने स्वीकार किया कि कुछ तकनीकी और संगठनात्मक कारणों से भुगतान में देरी हुई है। पार्टी की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा और कार्यालय को फिर से नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।
राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि टीएमसी राज्य की सत्ताधारी पार्टी है। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि जब एक बड़े राजनीतिक दल का जिला कार्यालय ही किराया और बिजली बिल समय पर नहीं चुका पा रहा, तो वह आम जनता के आर्थिक मुद्दों को कैसे समझेगा।
फिलहाल मामला भुगतान और मकान मालिक के साथ समझौते के जरिए सुलझाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इस घटना ने स्थानीय स्तर पर टीएमसी की संगठनात्मक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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