नई दिल्ली। हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) को लंबे समय तक बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब यह समस्या तेजी से युवाओं और किशोरों में भी देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आज के युवा पढ़ाई, करियर और प्रतिस्पर्धा के दबाव में लगातार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही जंक फूड, अधिक नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना और शारीरिक गतिविधियों की कमी रक्तचाप बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बन गए हैं।
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
गातार मानसिक तनाव और चिंता
देर रात तक जागना और अपर्याप्त नींद
फास्ट फूड और अधिक नमक का सेवन
नियमित व्यायाम की कमी
मोटापा और बढ़ता वजन
धूम्रपान एवं शराब का सेवन
डॉक्टरों का कहना है कि हाइपरटेंशन को केवल बुजुर्गों की बीमारी मानना अब गलत है। कई मामलों में युवाओं को लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे अक्सर "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है।
किन लक्षणों पर ध्यान दें?
बार-बार सिरदर्द
चक्कर आना
थकान और कमजोरी
धड़कन तेज महसूस होना
सांस लेने में परेशानी
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
हालांकि कई लोगों में उच्च रक्तचाप बिना किसी लक्षण के भी मौजूद हो सकता है। इसलिए नियमित जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बचाव के उपाय
रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
संतुलित और कम नमक वाला भोजन लें।
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें।
पर्याप्त नींद लें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परिवार में पहले से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या मधुमेह का इतिहास है, तो युवाओं को और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। समय रहते जांच और जीवनशैली में सुधार करके हाइपरटेंशन के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना ही इस बढ़ती समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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