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हेल्थ डेस्क। धूप से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन को सबसे प्रभावी उपायों में गिना जाता है। इसके बावजूद कई लोग शिकायत करते हैं कि वे रोज सनस्क्रीन लगाते हैं, फिर भी उनकी त्वचा टैन हो जाती है। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो संभव है कि समस्या सनस्क्रीन में नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के तरीके में हो।
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सनस्क्रीन लगा लेना ही पर्याप्त नहीं है। सही SPF, सही मात्रा और सही समय पर दोबारा लगाना भी उतना ही जरूरी है।
1. पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन नहीं लगाना
अधिकांश लोग चेहरे पर जरूरत से कम सनस्क्रीन लगाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक चेहरे और गर्दन के लिए लगभग दो उंगलियों जितनी मात्रा में सनस्क्रीन लगानी चाहिए। कम मात्रा लगाने से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।
2. बार-बार दोबारा नहीं लगाना
एक बार सुबह सनस्क्रीन लगाने से पूरे दिन सुरक्षा नहीं मिलती।
हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए।
यदि पसीना ज्यादा आता है या आप बाहर हैं, तो री-एप्लाई करना और भी जरूरी हो जाता है।
3. SPF कम होना
यदि आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं, तो SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनना बेहतर माना जाता है।
SPF 15 दैनिक हल्के उपयोग के लिए पर्याप्त हो सकता है।
तेज धूप में SPF 30 या SPF 50 अधिक प्रभावी सुरक्षा देता है।
4. केवल सनस्क्रीन पर निर्भर रहना
सनस्क्रीन महत्वपूर्ण है, लेकिन यह 100% सुरक्षा नहीं देता।
टैनिंग से बचने के लिए
टोपी या कैप पहनें।
धूप का चश्मा लगाएं।
छाता इस्तेमाल करें।
दोपहर 11 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में कम निकलें।
5. पानी या पसीने से सनस्क्रीन हट जाना
मानसून और गर्मियों में पसीना अधिक आने से सनस्क्रीन की परत कमजोर हो सकती है।
यदि आप:
जिम जाते हैं,
तैराकी करते हैं,
या ज्यादा पसीना बहाते हैं,
तो वाटर-रेसिस्टेंट सनस्क्रीन का उपयोग करें
6. UV किरणें केवल धूप में ही नहीं होतीं
कई लोग सोचते हैं कि बादल होने पर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं होती, जबकि UV किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यही कारण है कि बरसात और सर्दियों में भी टैनिंग हो सकती है।
7. कुछ दवाएं और स्किन कंडीशन भी हो सकती हैं जिम्मेदार
कुछ दवाएं त्वचा को सूरज की रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशील बना देती हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, मेलाज्मा या हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी समस्याओं के कारण भी त्वचा जल्दी टैन हो सकती है।
डर्माटोलॉजिस्ट की सलाह
ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन चुनें।
बाहर निकलने से 15-20 मिनट पहले लगाएं।
हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाएं।
सनस्क्रीन के साथ शारीरिक सुरक्षा उपाय भी अपनाएं।
लगातार टैनिंग या पिग्मेंटेशन की समस्या होने पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें।
सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग होना आमतौर पर गलत उपयोग, कम मात्रा, री-एप्लिकेशन न करने या अत्यधिक धूप के संपर्क में रहने की वजह से होता है। सही तरीके से सनस्क्रीन का इस्तेमाल और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाकर टैनिंग की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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