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तिरुवनंतपुरम। केरल में जनसंख्या संरचना तेजी से बदल रही है। राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार हिंदू और ईसाई समुदायों में जन्म लेने वालों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि बुजुर्ग आबादी बढ़ने से मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है। इसके चलते इन समुदायों की जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि केरल में लंबे समय से चली आ रही कम प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट), उच्च शिक्षा, शहरीकरण और बढ़ती जीवन प्रत्याशा का परिणाम है। राज्य की आबादी तेजी से वृद्धावस्था की ओर बढ़ रही है, जिसके कारण जन्म और मृत्यु के बीच का अंतर लगातार कम हो रहा है।
आंकड़ों के अनुसार केरल में कुल जन्मदर पिछले दो दशकों में लगातार घटी है। 2023 में राज्य में लगभग 3.93 लाख जन्म दर्ज किए गए, जबकि मौतों का आंकड़ा 3.04 लाख से अधिक रहा। प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि अब बहुत सीमित रह गई है।
जनसांख्यिकीय अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि हिंदू और ईसाई समुदायों में जन्मदर अपेक्षाकृत कम होने से उनकी आबादी की वृद्धि धीमी हुई है, जबकि मुस्लिम समुदाय में जन्मदर अपेक्षाकृत अधिक रहने से धार्मिक जनसंख्या अनुपात में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि हिंदू अब भी केरल का सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो 2041 तक केरल की आयु संरचना, श्रमबल और सामाजिक-आर्थिक नीतियों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। बुजुर्ग आबादी के बढ़ते अनुपात के कारण स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और कार्यबल उपलब्धता जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

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